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होर्मुज के बाद भारत को एक और झटका, ईरान ने मचाई तबाही तो तीसरे सबसे बड़े सप्लायर ने घटाया 70% तेल प्रोडक्शन

बगदाद: इराक ने अपने कच्चे तेल का उत्पादन घटाकर लगभग 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दिया है। ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकर गुजर नहीं पा रहे हैं इसी वजह से तेल प्रोडक्शन को करने का फैसला लिया गया है। इससे पहले इराक के पास अमेरिकी तेल टैंकर जहाज पर ड्रोन बोट से हमला किया गया था जिसमें भारत के एक नाविक की मौत हो गई थी। इराक के तेल मंत्री हयान अब्देल-गनी ने गुरुवार को कहा कि ‘फारसी खाड़ी में जारी संघर्ष के कारण तेल निर्यात के मुख्य रास्ते लगातार बाधित हो रहे हैं।’

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने से पहले इराक प्रतिदिन 4 मिलियन बैरल से कुछ ज्यादा तेल का उत्पादन कर रहा था। ईरान युद्ध के बीच मिडिल ईस्ट की स्थिति काफी खराब होते जा रही है। दो दिन पहले इराक के पास एक क्रूड ऑयल टैंकर पर काम कर रहे एक भारतीय मरीन इंजीनियर की ड्रोन हमले में मौत हो गई। मृतक देवनंदन प्रसाद सिंह अमेरिका के स्वामित्व वाले टैंकर ‘सेफसी विष्णु’ पर एडिशनल चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। अधिकारियों ने बताया कि हमले के बाद उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और बाद में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

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इराक ने तेल उत्पादन में भारी कटौती की

इराक ने मार्च 2026 के मध्य तक अपने कच्चे तेल का उत्पादन नाटकीय रूप से घटाकर लगभग 1.2 से 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) कर दिया है। यह उसके पिछले उत्पादन जो लगभग 4.3 मिलियन bpd था उसमें लगभग 70% की भारी गिरावट को दर्शाता है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण होरमुज़ जलडमरूमध्य बंद होना इसका सबसे बड़ा कारण है।

  • निर्यात मार्ग बंद होने की वजह से इराक के स्टोरेज टैंक अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच गए हैं जिससे ऑपरेशनल ओवरफ्लो से बचने के लिए उत्पादन में तत्काल कटौती करनी पड़ी है।
  • इसके अलावा रुमैला वेस्ट कुर्ना 2 और मैसन सहित प्रमुख दक्षिणी क्षेत्रों से उत्पादन में भारी कटौती की गई है। जैसे रुमैला का उत्पादन 700,000 bpd तक गिर गया है।
  • इराक के सरकारी राजस्व का 90% से ज्यादा हिस्सा तेल निर्यात से आता है। इराक का सेंट्रल बैंक अभी ऐसे विकल्पों पर विचार कर रहा है जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह और जरूरी खर्च जारी रहें।
  • रिपोर्ट के मुताबिक इराक, तुर्की, सीरिया और जॉर्डन के रास्ते ट्रकों से रोजाना लगभग 200,000 बैरल तेल भेजकर अपने नुकसान को कम करने की कोशिश कर रहा है।
  • इराक का तेल मंत्रालय उत्तरी किरकुक के तेल क्षेत्रों से सेहान पाइपलाइन के जरिए तुर्की तक तेल का प्रवाह फिर से शुरू करने या उसे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए उसने कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार से कम से कम 100,000 बैरल प्रतिदिन तेल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

LPG संकट से जूझ रहे भारत पर क्या होगा असर?
ईरान युद्ध की वजह से भारत के सामने पहले ही LPG संकट है और अब इराक में तेल प्रोडक्शन का 70 फीसदी तक घटना बहुत बड़े टेंशन की बात है। इराक भारत के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और शीर्ष स्तर का कच्चा तेल सप्लायर बना हुआ है। इराक लगातार रूस के साथ-साथ भारत के शीर्ष दो सप्लायरों में से एक रहा है और 2026 की शुरुआत तक भारत के कुल कच्चे तेल का लगभग 16.6% हिस्सा सप्लाई कर रहा है।

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  • फरवरी 2026 तक IOC जैसी भारतीय सरकारी रिफाइनरियों ने इराक से भारी मात्रा में तेल खरीदना जारी रखा है। वे रूस से तेल की सप्लाई में होने वाले उतार-चढ़ाव के बीच अपनी सप्लाई के स्रोतों में विविधता लाने के लिए इराक पर निर्भर हैं।
  • साल 2026 में जनवरी और फरवरी 2026 में इराक ने भारत के कुल तेल का लगभग 16.6% हिस्सा सप्लाई किया। इस दौरान सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी IOC (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन) ने अपने आयात समझौतों को स्थिर बनाए रखा और फरवरी 2026 में प्रतिदिन लगभग 0.465 मिलियन बैरल तेल खरीदा।
  • भारत कच्चे तेल के आयात पर 88% से भी अधिक निर्भर है। ऐसे में भारत के व्यापार संतुलन और ऊर्जा की मांग को पूरा करने के लिए इराक से होने वाली नियमित सप्लाई अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • इराक भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश रहा है ऐसे में 70 फीसदी तेल कटौती से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
  • तेल की कमी के कारण जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे तो भारत को उतना ही तेल खरीदने के लिए कहीं ज्यादा डॉलर खर्च करने होंगे। इससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घटेगा और व्यापार घाटा बढ़ जाएगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इराक से आपूर्ति कम होने पर भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस, गुयाना या अफ्रीकी देशों की ओर रुख करना होगा। हालांकि रूस पर लगे प्रतिबंधों और लंबी दूरी के कारण इन देशों से तेल मंगाना महंगा और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। दूसरी तरफ संकट से निपटने के लिए इराक निर्यात के वैकल्पिक विकल्पों पर विचार कर रहा है। तेल मंत्रालय ने कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार से किरकुक तेल क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने और तुर्की के सेहान बंदरगाह तक जाने वाली पाइपलाइन के जरिए हर दिन कम से कम 100,000 बैरल तेल उत्तर की ओर भेजने को कहा है।

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